बिलकिस गैंगरेप…SC का गुजरात सरकार से सवाल: इस केस के दोषियों को ही रिहाई में छूट क्यों; एडवाइजरी कमेटी का ब्योरा मांगा

नई दिल्ली5 मिनट पहले

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बिलकिस बानो ने 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई के खिलाफ 30 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो गैंगरेप केस में गुरुवार 17 अगस्त को सुनवाई हुई। गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ASG राजू ने कोर्ट में कहा कि कानून यह नहीं है कि हर किसी को हमेशा के लिए सजा दी जाए। कैदियों को सुधार का मौका मिलना चाहिए।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि रिहाई में छूट का फायदा सिर्फ बिलकिस के दोषियों को ही क्यों दिया गया, बाकी कैदियों को ऐसी छूट क्यों नहीं मिली।

अदालत ने यह भी पूछा कि जब गोधरा की कोर्ट ने ट्रायल नहीं किया, तो उससे राय क्यों मांगी गई? बेंच ने इस मामले में एडवाइजरी कमेटी का ब्योरा मांगा है।

अगली सुनवाई 24 अगस्त को दोपहर 2 बजे से जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुईयां की बेंच में होगी।

जस्टिस नागरत्ना ने पूछा- रिहाई में छूट को कैदियों पर कितना लागू किया जा रहा

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों के होने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा- रिहाई में छूट को कैदियों पर कितना लागू किया जा रहा है? हमारी जेलें खचाखच भरी क्यों हैं? खासतौर पर विचाराधीन कैदियों से? हमारा सवाल था कि छूट की नीति को चुनिंदा तरीके से क्यों लागू किया जा रहा है? सुधार का अवसर हर कैदी को दिया जाना चाहिए। सिर्फ कुछ कैदियों को ही नहीं।

कोरोना में जेलों में भीड़भाड़ चिंता का कारण थी, इसलिए कैदियों को पैरोल दी गई। लेकिन उन मामलों में छूट नीति कहां तक ​​लागू की जा रही है जहां सभी व्यक्ति जिन्होंने 14 साल की सजा पूरी कर ली है।

गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में हुआ था बिलकिस के साथ हादसा
बिलकिस बानो के साथ यह हादसा जब हुआ तब वे 21 साल की और पांच महीने की गर्भवती थीं। 2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के डर से भागते समय उनके साथ गैंगरेप किया गया था। दंगों में मारे गए परिवार के सात सदस्यों में से उनकी तीन साल की बेटी भी एक थी।

इस मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 15 अगस्त 2023 को गुजरात सरकार ने सभी दोषियों को जेल से रिहा कर दिया था। जिसके खिलाफ बिलकिस ने 30 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।

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आरोपी के वकील बोले- जब पीड़ित मौजूद, तब दूसरों के पास याचिका का अधिकार नहीं

दोषियों में से एक का पक्ष रखने आए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने बेंच को बताया कि एक बार जब पीड़ित व्यक्ति (बिलकिस बानो) कोर्ट में याचिकाकर्ता के तौर पर मौजूद है, तो इस तरह के मामलों में दूसरों के पास अदालत में मुकदमा लाने का अधिकार नहीं हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर…

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